
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
चंद्रपुर जिले के बल्लारपुर शहर में इन दिनों शहर का विकास नहीं, फ्लेक्स बैनर का विकास सबसे तेज चल रहा है। नगरपालिका का 14 नवंबर 2022 का सरकारी आदेश कचरे के डिब्बे में और चौराहे-चौराहे पर नेताओं के 20×10 के फोटो… ये है आज का बल्लारपुर मॉडल।
बिना अनुमति, बिना रोक-टोक, कहीं भी, किसी भी खंभे, पेड़, दीवार और नाली के ऊपर तक फ्लेक्स टंग गए हैं। लग रहा है शहर में फ्लेक्स बैनर की बाढ़ आ गई है और नगरपालिका छाता लेकर बैठी है।
होड़ मची है ‘सबसे बड़ा बैनर’ की
यहां नेताओं के जन्मदिन हैं, वहां कोचिंग का एडमिशन और उस नुक्कड़ पर ‘हमारे लाडले नेता जी को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई’। नेताओं के चेलों-चमचों में तो होड़ मची है कि किसका बैनर सबसे बड़ा, सबसे चमकीला और हर चौराहे पर लगेगा। मानो बैनर नहीं, चुनावी रैली चल रही हो।
स्कूल-कॉलेज भी पीछे नहीं। एडमिशन के लिए गेट से लेकर ट्रैफिक सिग्नल तक सब बुक। शहर में अब जगह कम पड़ रही है, बैनर ज्यादा।
नगरपालिका बनी ‘धृतराष्ट्र’
नगरपालिका प्रशासन इस पूरे तमाशे को आंख बंद करके देख रहा है। बीच-बीच में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के नाम पर 2-4 बैनर उतार भी दिए, लेकिन लगाने वालों पर आज तक एक रुपये का जुर्माना नहीं।
मतलब गुनाह भी करो और सजा भी मत लो – ये वाली स्कीम सिर्फ बल्लारपुर में चलती है।
जनता पूछ रही है – इजाजत किसने दी?
सबसे बड़ा सवाल ये है कि नगरपालिका की बिना स्वीकृति के ये सारे बोर्ड-बैनर लग कैसे रहे हैं? क्या अनुमति के लिए भी कोई ‘स्पेशल खिड़की’ खुली है जिसके बारे में आम जनता को पता नहीं?
14 नवंबर 2022 का सरकारी आदेश फाइल में सो रहा है और शहर फ्लेक्स में डूब रहा है।

अब देखना ये है कि नगरपालिका जागेगी या फिर अगले नेता के जन्मदिन तक इंतजार करेगी, ताकि एक और ‘सबसे बड़ा’ बैनर देखने को मिल जाए।








